Tuesday, May 22, 2012

इनायत करो बन के मेरी हमसफ़र

घटायें दिल की पुकारें तुम्हें ,
मौसम की मस्ती निहारें तुम्हें ,
बांध जाओ इश्क की कशिश से
मिल जाएँ सारे नज़ारे तुम्हें ,

बिन तेरे बन गया हूँ मै उल्फत का शहर ,
इनायत करो  बन के
मेरी हमसफ़र ,

चहक उठेंगे ये गली चौबारे ,
महक उठेंगे ये गुलशन सारे ,
लौट आएँगी फिर वो खुशियाँ ,
जब बन जाओगे तुम हमारे,

झलक दो मिट जाये बेबसी का ज़हर ,

 इनायत करो  बन के मेरी हमसफ़र

लहरा दो अपना आँचल थाम लूँगा मै,
भर लो बाँहों में कुछ न कहूँगा मै,
गुज़रा हुआ ये पल फिर न आयेगा ,
तुम कहो तो ये पल रोक दूँगा मै,

थाम लो ये बाहें जो यकीन लाए हो मुझ पर,
 
इनायत करो  बन के मेरी हमसफ़र

इश्क से सजा दूँगा तेरे रूप को ,
मै ओढ़ लूँगा तेरे तन की धूप को,
हर खुशी देने का वादा तो नहीं है ,
पर छीन लूँगा तुझसे तेरे ग़मों को,

खिल उठें धडकनें बरस जाओ कभी तो इस कदर ,

 इनायत करो  बन के मेरी हमसफ़र

किसी पत्थर में मूरत है

किसी  पत्थर  में  मूरत  है   कोई  पत्थर   की  मूरत  है
लो  हमने  देख  ली  दुनिया  जो  इतनी  खुबसूरत  है
जमाना  अपनी  समझे  पर   मुझे  अपनी  खबर  ये  है
तुझे  मेरी  जरुरत  है मुझे  तेरी  जरुरत  है  ...........

Saturday, October 29, 2011

अपनी मिटटी

अपनी मिटटी के लिए तड़प
क्या होती है ?
बिछड़ने के बाद जान पाए
उन्हें सलाम, जो वही रहे
हम तो भाई नकली हो गए
उन हवाओं को सलाम
जो उस मिटटी को छू कर आये
इन हवाओं में वह खुशबू कहाँ !
ये तो दूषित और नकली है
उस मिटटी के सीने से ,
लगने का मन कर रहा
अब जाकर जान पाए

Thursday, January 20, 2011

रिश्तों की हकीकत

रिश्तों की हकीकत ये कुछ ऐसे निभा लेते
ना हमने बुलाया था तो तुम ही बुला लेते

दिल में शिकवे थे अगर आते तो कभी एक दिन
कुछ तुम भी कह लेते कुछ हम भी सुना लेते

गुमसुम से ना रहते फिर रातों में अक्सर
डरते जो कभी ख्वाबों में हम तुम को बुला लेते

उजड़ा सा है आँगन भी, है बिना लिपा चूल्हा
तुम साथ अगर होते इस घर को सजा लेते

ना हमने बुलाया था तो तुम ही बुला लेते
कुछ तुम भी कह लेते कुछ हम भी सुना लेते.....

बारिशों को मेरी आँखों का पता दे जायेगा

बारिशों को मेरी आँखों का पता दे जायेगा
बुझते दिल को क्या पता था फिर हवा दे जायेगा

मैं तो एक पत्थर था यारों, मैंने ये सोचा ना था
दिल के सहरा में कोई आकर कुआँ दे जायेगा

मेरी चाहत में अयान इतनी इबादत देख कर
उसके घर का रास्ता मुझको खुदा दे जायेगा

बस इसी उम्मीद पे ये ज़हर मैं पीता रहा
ना दवा होगी मेरी तो वो दुआ दे जायेगा

हो गया वो मैकदे में खुद के जिस दिन रूबरू
मैकशों को जाम वाइज खुद भरा दे जायेगा...

Thursday, October 28, 2010

तूने खुद ही कहा था

तूने खुद ही कहा था मै तेरी कश्ती पे बोझ हूँ .... 
अब आँखे बंद ना कर मुझे डूबता भी देख .

यकीं किया था जिस दिल ने कभी तुम पर

यकीं किया था जिस दिल ने कभी तुम पर,
ये भी मुझको था यकीं कि तुम ही उसे तोड़ दोगे,
छोड़ा था जिस ज़माने को हमने तुम्हारे लिए,
मालूम था उसीकी खातिर कभी तुम हमें छोड़ दोगे.......